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नवरात्रों मे आठवे दिन यानि अष्टमी वाले दिन का विशेष महत्व माना जाता है तथा उस दिन महागौरी की पूजा की छठा देखते ही बनती है| ऐसा भी मानना है की यदि कोई व्यक्ति माँ गौरी की सच्चे मन से उपासना करता है तो उसके सभी दोष दूर हो जाते हैं और उसके पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते है | माँ गौरी के चमत्कारिक मंत्र का अपना महत्व है जिन्हे जपने से अनंत सुखों का फल मिलता है|
नवरात्र के नौ दिनों तक देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन की शुरुवात कलश स्धापना से की जाती है। इन नौ दिनों में प्रात:, मध्याह्न और संध्या के समय भगवती दुर्गा की पूजा करना सुभ माना जाता है तथा श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर भगवती को प्रसन्न किया जा सकता है।
ॐ महागौर्य: नम:।
ॐ नवनिधि गौरी महादैव्ये नम:।
ध्यान दें की हर मंत्र को जपने से पहले संकल्प लें। संस्कृत तथा शास्त्रोक्त न हो तो भी चलेगा। अपनी भाषा में नाम, गौत्र, मंत्र तथा मंत्र के देवता से मंत्रों की जप संख्या बोलकर जल छोड़ दें। जो लोग घटस्थापना करते हैं तथा देवी पाठ, जप करते हैं, अधिकतर इसी दिन अपने घर में हवन करते हैं। वैसे इस दिन की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं। वैभव, ऐश्वर्य प्रदान करने में इनकी समता कोई नहीं कर सकता है।
महा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें, उसके बाद देवी भगवती की पूरे विधि और विधान से पूजा करें। ख़ास ध्यान रहे की माता की प्रतिमा अच्छे वस्त्रों से सुसज्जित रहनी चाहिए| देवी माँ की प्रतिमा को सारे परंपरागत हथियारों से सजा होना जरुरी है जैसे की उनके सर पर जो छत्र होता है उस पर एक चांदी या सोने की छतरी भी होनी चाहिए|
अष्ठमी के दिन अगर पुरे तन-मन-धन से माँ दुर्गा की आराधना करते हैं तो ये बहुत ही शुभ व् फलदायी साबित होगा.
