सिंह संक्रांति 2018 : पुण्यकाल का शुभ मुहूर्त और संक्रांति का महत्व

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कर्क व केतु ने मकर राशि में 18 अगस्त से प्रवेश कर लिया है, वही दूसरी और सूर्यदेव ने भी कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश किया है। माना जाता है की बाधा मास में जब सूर्यदेवता अपनी राशि परिवर्तन करते हैं तो वह सिंह सक्रांति कहलाती है। इस सक्रांति में घी का एक विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण इस दिन घी का उपयोग काफी अच्छी मात्रा में किया जाता है, और तो और कई जगह सिंह सकरानी घी सक्रांति भी कहलायी जाती है।

आयुर्वेद में चरक संहिता के अंतर्गत यह वर्णित है कि गाय का शुद्ध (गौ घृत) अर्थात देसी घी स्मरण शक्ति, बुद्धि, ऊर्जा, बलवीर्य, ओज बढ़ाता है, गाय का घी वसावर्धक है तथा वात, पित्त, बुखार और विषैले पदार्थों का नाशक है। ऐसी मान्यता है की इस पावन दिन पर जो जो इंसान घी ग्रेहण नहीं करता उसे अगले जन्म में गनेल यानी घोंघे के रूप में जन्म लेना पड़ता है।

वहीं दूसरी ओर राहु और केतु के स्थान परिवर्तन से जीवन पर असर होगा। राहु व केतु पूर्व जीवन के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। राहु-केतु के बुरे प्रभावों से बचने के लिए शनिवार को सात्विक रहने तथा हनुमान जी को लाल फूल व मिठाई चढ़ाने से राहत मिलती है।

मान्यता

कहा गया है की घी- बुद्धि , शक्ति और ऊर्जा बढ़ता है, यह वात, बुखार और विषैले पदार्थो को ख़तम करने में सहायक है। गढ़वाल में इसे आम भाषा में घीया सक्रांद और कुमाऊ ने घी-टैटार कहते है। उत्तराखंड में लगभग हर स्थान पर इस दिन घी खाना सुभ माना गया है। यह भी कहा जाता है की जो इस दिन घी ग्रेहण नहीं करता उसे अगले जन्म में गनेल मतलब घोंघे के रूप में जन्म लेना होगा। यह शरीर और मन में वृद्धि का संकेत देता है। इसी वजह से एक नवजात बच्चे के सर और पाँव पर भी घी लगाया जाता है। और तो और बच्चे की जीभ में थोड़ा घी रक्खा भी जाता है।

इस साल 17 अगस्त 2018 को सूर्य सिंह राशि में प्रवेश कर रहा है और ब्राह्मणजनों के अनुसार भाद्रपद संक्रांति का समय दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से आरंभ होगा। उत्तराखंड में बाधप्राद संक्रांति ही घी संक्रांति के रूप में मनाई जाती है। जिनके घर में दूध देने वाले जानवर नहीं होते है उनके यहाँ गांव वाले दूध और घी पहुचाते है ।

कैसे मनाई जाती है?

इस दिन घरो में कई अलग अलग तरह के पकवान बनाये जाते है जिसमे से खीर प्रमुख है. ऐसा भी कहा जाता है की इस दिन दाल की भरवा रोश के साथ घी का ग्रहण किया जाता है। इस रोटी को बेडु की रोटी कहा जाता है। रोटी के साथ अरबी के पत्तो की सब्ज़ी बनायीं जाती है।

कैसे पाए सूर्य देव की कृपा सिंह संक्रांति पर?

  • सुबह जल्दी उठे
  • सुबह उठने के बाद सूर्येदेव को जल दें
  • पिता का आशीर्वाद लें
  • सुबह के समय आदित्यहृदयस्तोत्र का तीन बार पाठ करें
  • गेहूं का दान करें
  • गायत्री मंत्र का जप करें
  • गाय की सेवा करें। प्रत्येक रविवार को गो माता को रोटी और गुड़ खिलाएं

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