सावन मास में महामृत्युंजय जाप से दूर करें अपनी सभी परेशानियां

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महामृतियुंजय का मतलब है मृत्यु पर विजय। शिव को मृत्यु 'मृत्यु को जीतने वाला' मन गया है यह मंत्रभगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा प्राप्त करने का ज़रिया है, इस मंत्र का सवा लाख बार जप करने से गंभीर बीमारियाँ व ग्रहों के दुष्प्रभाव से को समाप्त किया जा सकता है।

महामृत्युंजय मंत्र को शिव जी का सबसे बड़ा मंत्र माना गया है हिन्दू धर्म में इसको प्राण रक्षक मंत्र व महामोक्ष मंत्र भी कहा जाता है। इस मंत्र के बारे में ये भी कहा जाता है की महामृत्युंजय मंत्र के जातक से मृत्यु भी डरती है। भगवान शिव को महाकाल कहा जाता है और अगर मृत्यु के समीप आने परअगर इस मंत्र का जाप करने लगें तो यमराज को भी जातक को अपने साथ ले जाने की हिम्मत नहीं होगी।

महामृत्युंजय मंत्र को अगर सच्ची श्रद्धा और भक्ति से जपा जाए तो इसके बहुत ही सकारात्मक और जादुई परिणाम होते हैं। महामृत्युंजय मंत्र को अगर सच्ची श्रद्धा और भक्ति से जपा जाए तो इसके बहुत ही सकारात्मक और जादुई परिणाम होते हैं। इस मंत्र का उचित उच्चारण जीवन में सभी परेशानियों को नष्ट करने की ताकत रखता है और जो लोग लम्बी बीमारियों से परेशान हैं उन्हें भी बहुत राहत मिलती है।

इस चमत्कारिक मंत्र के बारे में पुराणों व् शास्त्रों में ये तक कहा गया है की गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति भी स्वस्थ हो जाता है व मृत्यु के मुंह में पंहुच चुका व्यक्ति दीर्घायु का आशीर्वाद पाता है।

कब और कैसे करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप?

1. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने का लिए सुबह 2 से 4 बजे का समय उत्तम मन गया है लेकिन अगर आप किसी कारणवश इस दौरान जाप नहीं कर सकते तो तो आपन स्नान पश्चात साफ़ वस्त्र धारण कर रुद्राक्ष की माला लेके 5 बार इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
2. स्नान करते समय शरीर पर पानी डालते वक्त मंत्रोच्चार करने से स्वस्थ लाभ होता है।
3. दूध को देखते हुए अगर 11 बार इसक चमत्कारिक मंत्र का जाप करने के पश्चात उस दूध को पिया जाए तो यौवन की सुरक्षा होती है। यही कारण है की ज्योतिष व् पंडित बीमार व्यक्तियों को व् गृह दोष से पीड़ित व्यक्तियों को
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की सलाह देते हैं। इसके अलांवा अगर आपकी जन्मकुंडली में सूर्यादि ग्रहों द्वारा किसी प्रकार की खतरे की आशंका या किसी प्रक्कर की गंभीर बीमारी के प्रभावित होने पर या अपने भाई-मित्र के ऊपर संकट आने पर, देश विदेश जाने में रूकावट या धन संपत्ति दिक्कतें आने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप व् शंकर भगवान् की उपासना करें इससे मन को शान्ति मिलती है, रोग मुक्ति होती है व् सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस बात का ध्यान अवश्य दें की जप करने के पश्चात हवन, तर्पण व् मार्जन करें, मंत्र का जप सुयोग्य वैदिक विद्वान के मार्गदर्शन में ही संपन्न करें वर्ना अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

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