आखिर क्यों मनाया जाता है करवाचौथ,जानिए कुछ रोचक बातें ?

नवरात्रि के हर दिन करें ये उपाय ,माता रानी की बनेगी असीम कृपा
October 10, 2018
जानिए क्यों मनाते है धनतेरस और क्यों जलाते है यम के नाम का दीपक?
November 2, 2018

करवा चौथ सुहागिन महिलाओ का एक प्रमुख व्रत है, ऐसा माना जाता है की जो भी सुहागन महिला पूरी विधि विधान से करवा चौथ का व्रत करते हुए कथा सुनती या पढ़ती है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है। यह व्रत महिलाओ के लिए बेहत ख़ास है, इस दिन महिलाये दिन भर भुकी प्यासी रहकर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती हैँ, साथ ही कुवारी लड़किया भी मनवांछित वर पाने के लिए या फिर अपने होने वाले पति के लिए निर्जला व्रत रखती है। ऐसा माना गया है की इस दिन पुरे विधि विधान से माता पार्वती और भगवान् ग़णेश की पूजा अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है, उसके बाद रात में चाँद को अर्घ्य देने के बाद ही यह व्रत संपन्न होता है। क्या आप जानते यह व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है?

कैसे मनाया जाता है करवा चौथ?

यह त्यौहार कई दिन पहले से ही शुरू हो जाता है, सुहागन महिलाये कपडे, गहने और शृंगार का सारा सामान और पूजा सामग्री खरीदती है, करवा चौथ वाले दिन महिलाये सूरज उगने से पहले सरगी खाती है, इसके बाद सुबह हाथ और पेअर पर मेहँदी लगाती है और पूजा की थालियों को सजाया जाता है। व्रत करने वाली महिलाये शाम ढलने से पहले मंदिर, घर या किसी बगीचे में इखट्टा होती है और एक साथ करवा चौथ की पूजा करती है। इस दौरान गोबर और पिली मिटटी से पार्वती जी की प्रकिमा स्थापित की जाती है। आज कल माता गौरी की पहले से त्यार करके प्रकिमा रख दिया जाता है। विधि विधान करने के बाद सभी औरतें किसी बुजुर्ग महिला से करवा चौथ की कथा , इस दौरान सभी महिलाये लाल जोड़े में पुरे सोलह श्रृंगार के साथ है। चाँद उदय पर अर्घ्य दिया जाता है और पति की आरती है। साथ भी पति के हाथो पानी पीकर महिलाओ के उपवास का समापन हो जाता है।

पूजन सामग्री

करवा चौथ के व्रत से एक दो दिन पहले से साड़ी पूजा की सामग्री को इखट्टा करके घर के मंदिर में रख दें। पूजा सामग्री इस प्रकार है, मिट्टी का टोंटीदार करवा व् ढक्कन , पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रुई, रोली, चन्दन, कुमकुम, देसी दही, शहद, चीनी, हल्दी, चावल, मिठाई, चीनी का बुरा, मेहँदी, सिंदूर, चुड़ि, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए मिटटी ,लकड़ी का आसान, चलनी , आठ पुरीओ की आठवीँ, हलुआ और दक्षिणा के पैसे।

करवा चौथ सरगी

करवा चौथ के दिन सरगी का भी भोत विशेष महत्व है, इस करने वाली महिलाये और लड़किया सूरज उगने से पहले उठकर स्नान करने के बाद सरगी खाती है। सरगी आम तौर पर सास त्यार करती है, सरगी में मुख्य मेवे, नारियल, फल मिठाई खाई जाती है, अगर सास नहीं है तो घर का कोई बड़ा भी अपनी बहु के लिए सरगी बना सकती है। जो लड़किया शादी से पहले करवा चौथ का व्रत रख रही है उनके ससुराल वाले शाम पहले उसे सरगी दें। सरगी सुबह सूरज उगने से पहले खाई जाती है ताकि दिन भर ऊर्जा बानी रहे।

करवा चौथ कथा

मान्यताओं के अनुसार एक साहूकार के साथ लड़के और एक लड़की थी। सेठानी समेत उसकी बहुओ और बेटी ने करवा चौथ का व्रत रखा था। रात में शाहूकार क़े लडक़े भोजाण कारण लगें तो उन्होनें अपनी बेहेन से भोजन के लिए कहा। इस बेहेन ने जवाब दिया – भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने पर अर्घ्य देकर भोजन करूंगी.”

बेहेन की यह बात सुन कर भइओ ने बहार जाके अग्नि जला दी और छलनी ले जाकर उसमें से प्रकाश दिखाते हुए उन्होंने बहन से कहा- “बहन! चांद निकल आया है. अर्घ्य देकर भोजन कर लो.” यह सब सुनकर अपने भाबियों से कहा ” “आओ तुम भी चन्द्रमा को अर्घ्य दे लो.” परन्व इस कांड को जानती थीं, उन्होंने कहा- “बाई! अभी चांद नहीं निकला है, तेरे भाई तेरे से धोखा करते हुए अग्नि का प्रकाश छलनी से दिखा रहे हैं.” भाभियों की बात सुनकर भी उसने कुछ ध्यान न दिया और भाइयों दकी तरफ से दिखाए गए प्रकाश को ही अर्घ्य देकर भोजन कर लिया. इस प्रकार व्रत भंग करने से गणेश जी उस पर अप्रस्सन हो गए. इन सब चीज़ो क बाद उसका पति काफी बीमार हो गया कुछ घर में था सब उसकी बीमारी में लग गया

जब उसे अपने दोष का एहसास हुआ तो उसने पश्चाताप किया गणेश जी की प्राथना करते हुए विधि विधान से नः चतुर्थी का व्रत करना आरम्भ कर दिया। श्रद्धानुसार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *